हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्फ़हान में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि आयतुल्लाह सय्यद यूसुफ़ तबातबाई नजाद ने प्रांत के संस्कृति एवं इस्लामी मार्गदर्शन विभाग के महानिदेशक से मुलाक़ात की। यह मुलाक़ात इस्फ़हान को देश की नहजुल बलाग़ा राजधानी घोषित किए जाने के लिए तैयार की गई फ़ाइल और अब तक की गई गतिविधियों की रिपोर्ट पेश करने के उद्देश्य से हुई।
इस अवसर पर आयतुल्लाह तबातबाई नजाद ने कहा कि क़ुरआनी संस्कृति के विस्तार के लिए नमाज़ के बाद मस्जिदों में प्रभावशाली लहजे में क़ुरआन की तिलावत की जानी चाहिए। साथ ही, बचपन से ही क़ुरआन की सही आवाज़ और तिलावत का प्रशिक्षण देने की परंपरा को आम संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
इस्फ़हान के इमामे जुमा ने दैनिक जीवन में क़ुरआन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि क़ुरआनी संस्कृति के विकास के लिए मस्जिदों की गतिविधियों के साथ गहरा संबंध स्थापित करना ज़रूरी है, ताकि नमाज़ के बाद प्रभावशाली अंदाज़ में क़ुरआन की तिलावत हो सके।
प्रांत में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि ने बचपन से ही क़ुरआन की सही आवाज़ और तिलावत सिखाने पर भी बल दिया, ताकि यह अभ्यास आम संस्कृति का हिस्सा बन सके। उन्होंने क़ुरआन की प्रमुख आयतों को विषयवार संकलित करके उनकी शिक्षा देने का सुझाव भी दिया।
नहजुल बलाग़ा का प्रसार: उसकी शिक्षाओं पर अमल सबसे बड़ा प्रभाव
आयतुल्लाह तबातबाई नजाद ने नहजुल बलाग़ा के महत्व और क़ुरआन मजीद के साथ उसके संबंध पर चर्चा करते हुए कहा कि नहजुल बलाग़ा के प्रसार का सबसे बड़ा परिणाम उसकी शिक्षाओं पर अमल के माध्यम से इंसान की आत्मा और व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाना है।
उन्होंने ज्ञान और व्यवहार के बीच तालमेल की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा कि नहजुल बलाग़ा के प्रसार की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम उसकी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाना है।
इस बैठक में इस्फ़हान प्रांत के संस्कृति एवं इस्लामी मार्गदर्शन विभाग के महानिदेशक सैयदीन निया ने बताया कि उनका प्रांत ‘क़ुरआन की राजधानी’ और ‘नहजुल बलाग़ा की राजधानी’ — दोनों श्रेणियों में उम्मीदवार है। उन्होंने कहा कि अब तक इस्फ़हान की फ़ाइल का मूल्यांकन संतोषजनक और आशाजनक रहा है। प्रांत की गतिविधियों की रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में तैयार करके प्रस्तुत की जानी है।
उन्होंने प्रांत की क़ुरआनी संस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इस वर्ष इस्फ़हान के क़ुरआनी बजट में अन्य सभी प्रांतों की तुलना में अधिक वृद्धि हुई है। उनके अनुसार, यह बढ़ोतरी इन संस्थाओं के अच्छे और निरंतर प्रगतिशील कार्यों का परिणाम है।
राजधानी का चयन कार्य की शुरुआत है
बैठक में आगे संस्कृति एवं इस्लामी मार्गदर्शन मंत्रालय के क़ुरआन और अहले बैत (अ) के प्रचार-प्रसार विभाग के महानिदेशक सईद मजीदी ने बताया कि विभिन्न धार्मिक राजधानियों के चयन की योजना वर्ष 2020 से शुरू हुई थी।
उन्होंने कहा कि काशान को नहजुल बलाग़ा की राजधानी, बुशहर को क़ुरआन की राजधानी और यज़्द को सहीफ़ा सज्जादिया की राजधानी चुना गया था। वर्ष 2025 के अंत में दोबारा मूल्यांकन के बाद इन शहरों को अधूरे कार्य पूरे करने का एक और अवसर देने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि नियमावली में संशोधन किया गया और प्रत्येक शहर के लिए लगभग 15 वास्तविक तथा कानूनी सदस्यों वाली एक संचालन परिषद गठित की गई। आवेदन आमंत्रित किए जाने के बाद विभिन्न प्रपत्रों के आधार पर प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा की गई।
मजीदी के अनुसार, मूल्यांकन के दूसरे चरण में संस्थाओं, वक़्फ़ संपत्तियों और उपलब्ध क्षमताओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाता है। इसके साथ ही बुद्धिजीवियों से मुलाक़ात और प्रांतीय अधिकारियों के साथ बातचीत भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
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